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स्थापना: 14 नवम्बर 1962

उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ

मान्यता प्राप्त संगठन — शासन पत्र संख्या 75-4/II-A/359, दिनांक 14/11/1962

बारे में

संघ का इतिहास, उद्देश्य एवं यात्रा

उत्तर प्रदेश में लेखपालों के संगठनात्मक इतिहास का एक गौरवशाली अध्याय 14 नवम्बर 1962 को प्रारम्भ हुआ, जब लेखपालों के अधिकारों, सम्मान तथा सेवा संबंधी समस्याओं के समाधान हेतु पंडित मुरारी लाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्व लेखपाल संघ की स्थापना की गई। पंडित मुरारी लाल शर्मा को प्रदेश के लेखपाल आंदोलन का पुरोधा, मार्गदर्शक एवं संस्थापक माना जाता है।

संघ की स्थापना का मूल उद्देश्य लेखपालों को एक संगठित मंच प्रदान करना, उनकी सेवा शर्तों में सुधार लाना, कार्य परिस्थितियों को बेहतर बनाना तथा राजस्व प्रशासन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को उचित मान्यता दिलाना था। उस समय लेखपाल अनेक प्रशासनिक एवं सेवा संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहे थे, जिनके समाधान के लिए एक सशक्त एवं प्रभावी संगठन की आवश्यकता अनुभव की जा रही थी।

स्थापना के पश्चात संघ ने प्रदेश भर के लेखपालों को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया। समय-समय पर संघ ने लेखपालों के हितों की रक्षा, वेतन एवं सेवा संबंधी मांगों, पदोन्नति, स्थानांतरण नीति, कार्य सुविधाओं तथा प्रशासनिक सुधारों के लिए निरंतर संघर्ष किया। संगठन ने सदैव लोकतांत्रिक मूल्यों, अनुशासन एवं संगठनात्मक एकता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।

विगत छह दशकों से अधिक की अपनी गौरवशाली यात्रा में उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ ने न केवल लेखपालों के अधिकारों की रक्षा की है, बल्कि राजस्व प्रशासन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं जनोन्मुखी बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। संघ ने लेखपालों के व्यावसायिक विकास, प्रशिक्षण, तकनीकी दक्षता तथा आधुनिक राजस्व प्रणाली के अनुरूप कार्य संस्कृति के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

आज उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ प्रदेश के लाखों किसानों, ग्रामीण नागरिकों एवं राजस्व प्रशासन से जुड़े हितधारकों की अपेक्षाओं के अनुरूप कार्य करते हुए लेखपालों के हितों और राजस्व व्यवस्था की मजबूती के लिए निरंतर प्रयासरत है।

संघ के संस्थापक पंडित मुरारी लाल शर्मा की स्मृति एवं योगदान के सम्मान में प्रत्येक वर्ष 14 नवम्बर को प्रदेश भर में स्थापना दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर संगठन के इतिहास, संघर्षों एवं उपलब्धियों को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है तथा संगठन को और अधिक सशक्त बनाने का संकल्प लिया जाता है।

संघ की शक्ति उसकी एकता में निहित है, और एक सशक्त संगठन ही लेखपालों के सम्मान एवं अधिकारों का वास्तविक संरक्षक होता है।